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नीम के साए तले फिर से खिलती मुस्कुराती ....पैंजी....
Friday, December 21, 2007
मेरी शामें
बीतती हैं
झींगुरों और मछरों
कि युगलबंदी
सुनते ही
आसमान के सितारों
जड़े चंदोवे तले ....
और बेशरम चाँद की
छेड़ती
मुस्कुराती नजरों
के साए में....
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phool kabhi murjhaate nahi....muskuraate hain bas...
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मेरी शामें बीतती हैंझींगुरों और मछरोंकि युगलबंदी स...
बालकनी से झांकता चाँदमुस्कुराता है मेरी बातों परसो...
आओ और देखो ,मेरा अकेलापनसालता है मन कोसूनापनवो चुप...
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